करवा चौथ 2017: जानिए क्या है करवाचौथ के व्रत को सफल बनाने की पूजा विधि (Karva Chauth 2017)

Rudraabhishek Puja Mahashivratri 2020


करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में किया जाता है. करवा चौथ स्त्रियों का सर्वाधिक लोकप्रिय व्रत है. सौभाग्यवती स्त्रियां अटल सुहाग, पति की दीर्घ आयु, स्वास्थ्य व मंगलकामना के लिए करवा चौथ के दिन व्रत करती हैं.

करवा चौथ के व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश तथा चंद्रमा का पूजन करने का विधान है. स्त्रियां चंद्रोदय के बाद चंद्रमा के दर्शन कर अर्ध्य देकर ही जल-भोजन ग्रहण करती हैं. पूजा के बाद तांबे या मिट्टी के करवे में चावल, उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री जैसे- कंघी, शीशा, सिंदूर, चूड़ियां, रिबन व रुपया रखकर दान करना चाहिए तथा सास के पांव छूकर फल, मेवा व सुहाग की सारी सामग्री उन्हें देनी चाहिए.

करवा चौथ व्रत पूजन विधि:

  1. सूरज के उदय होने से पहले नहाकर व्रत का संकल्प लें और घर के बड़ों द्वारा दी गई सरगी खाएं। सरगी में मिठाई, फल, सेंवई, पूड़ी और साज-श्रृंगार का सामान दिया जाता है। सरगी में प्याज और लहसुन से भोजन बिल्कुल भी ना खाएं।
  2. सरगी के बाद करवाचौथ का निर्जला व्रत का आरंभ हो जाता है। माता पार्वती, भगवान शिव और गणेश जी का ध्यान करते रहना चाहिए।
  3. दिवार पर गेरु से फलक बनाकर पीसे चावलों के घोल से करवा बनाएं। इस कला को करवा धरना कहा जाता है जो एक पौराणिक परंपरा है।
  4. आठ पूड़ियों की अठावरी, हलवा और पक्का खाना बनाना चाहिए।
  5. पीली मिट्टी से माता गौरी और गणेश जी का स्वरुप बनाएं। माता गौरी की गोद में भगवान गणेश का स्वरुप बैठाएं। इन स्वरुपों की पूजा शाम के समय की जाती है।
  6. माता गौरी को लकड़ी के सिंहासन पर बैठाएं और लाल रंग की चुन्नी पहनाएं और श्रृंगार सामाग्री से श्रृंगार करें। इसके बाद उनकी मूर्ति के सामने जल से भरा हुआ कलश रख दें।
  7. गौरी और गणेश के स्वरुपों की पूजा करें। इसके साथ- नम: शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्। प्रयच्छ भक्तियुक्तनां नारीणां हरवल्लभे।। अधिकतर महिलाएं अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही पूजा करती हैं।
  8. इसके बाद करवा चौथ की कहानी सुननी चाहिए। कथा सुनने के बाद घर के सभी बड़ों का आशीर्वाद लेना चाहिए।
  9. सायंकाल चंद्रमा के उदित हो जाने पर चंद्रमा का पूजन कर अर्घ्य प्रदान करें. इसके पश्चात ब्राह्मण, सुहागिन स्त्रियों और पति के माता-पिता को भोजन कराएं. भोजन के पश्चात ब्राह्मणों को दक्षिणा दें.


© 2021 BHAGWAN BHAJAN | All Rights Reserved | Developed by Mera Online Business